चेन्नै उपधान प्रवचन - १०/१२/२०१३

  श्री आदिनाथ जैन श्वेताम्बर मंदिर(चेन्नई पुलल) में बिराजित प्रवचन प्रभावक पूज्य आचार्य श्री अजितशेखरसूरीश्वरजी मा.सा. ने विशाल प्रवचन सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि:

  •  दुनिया को जीतने वाला सफल कहा जाता है । लेकिन दोषो को जीतने वाला महान कहा जाता है । 
  • अरिहंत प्रभु को दुनिया भर की सभी प्रकार की विद्या सहज सिद्ध होती है । दुनिया में सभी विद्याओ से समर्थ विद्या - प्रयत्न के प्राप्त करने योग्य विद्या एक ही है - वह है वैराग्य विद्या । 
  • वीतरागता नाम कि विद्या सिद्ध करने से केवलज्ञान रूपी फल सहज ही प्राप्त होता है । 
  • आत्मा का प्रकाश पाने के लिए, दुन्यायी सम्बन्ध और साधनो में आसक्ति से बचने के लिए, आत्मा विद्या सिद्ध करने के लिए ही साधक बनना है, दुनिया में  प्रशंशा, वाह-वाह पाने के लिए साधक नहीं बनना । 
  • दुनिया में अभय, अखेद और अद्वेष की प्राप्ति वैरागी को ही होती है । 
  •  वैरागी को दुनिया के  कोई भी घटना-प्रसंग  ख़ुशी भी नहीं कर सकता तो दुखी भी नहीं कर सकता । 
  • पांच इन्द्रियो के विषयो का ऐसा चक्कर है कि, उसमे गिरने के बाद हमारी बाहर आने की ताकत नहीं है । जब तक टी.वी., मोबाइल, ए.सी. का उपभोग नहीं  किया था, तब तक प्रॉब्लम नहीं था, लेकिन एक बार टी.वी., मोबाइल, ए.सी. का उपभोग किया तो आज वो साधन के बिना एक सेकंड भी हमें नहीं चलता है । 
  • सोने की वीटी मिलती है तो हैम कीचड़ में भी हाथ डालने तैयार है, तो किसी से हमें ज्ञान मिलता है तो वह देनेवाला कौन है वो छोड़कर, विनयपूर्वक उसके पास से ज्ञान प्राप्त करना चाहिए । 
  • गुरु को समर्पित बने बिना दुनिया में वाह-वाह मिल सकती है, आत्मा कल्याण नहीं हो सकता है । 

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