चेन्नै उपधान प्रवचन - २१/११/२०१३

श्री आदिनाथ जैन श्वेताम्बर मंदिर(चेन्नई पुलल) में बिराजित प्रवचन प्रभावक पूज्य आचार्य श्री अजितशेखरसूरीश्वरजी मा.सा. ने सम्बोधित करते हुए कहा कि:

  • शनि गृह आये तो किसी को पसंद नहीं है -  वैसे क्रोधी आदमी आये तो किसी को पसंद नहीं आता है । दुनिया में सबसे बड़ी पनौती - problem क्रोध है । क्रोध वर्तमान जिंदगी को बिगाड़ता ही है, हमारे अगले जनम को भी बिगाड़ता है । 
  • बिना प्रयोजन दुनिया में कार्य करने वाला तीन ही व्यक्ति है - बालक, मुर्ख, पागल । अगर आप भी जो प्रवृत्ति कर रहो हो और उसको प्रयोजन पता नहीं तो तय कर लेना आप का नंबर किस में आता है ? नवकार माला क्यों गिनना? पूजा क्यों करना ? सामयिक क्यों करना ? हर प्रवृत्ति प्रयोजन पूर्वक करो । 
  • अनादिकाल से हमारी आत्मा के ऊपर क्रोध आदि दोषो के layer जम गए है । वो दोषो को जितने के लिए सख्त, सतत और दृढ़ पुरुषार्थ करना पड़ेगा । उसके लिए रोज संकल्प करो कि आज कि धर्म क्रिया में क्रोधकषाय जितने को कर रहा हूँ । इत्यादि प्रयोजन रखा तो भविष्य में अवश्य हम ये दोषो पर विजय प्राप्त कर सकेगे । 
  • विनियोग याने जो मुझे प्राप्त हुआ है मेरे संपर्क में  आने  वाले सभी जीवो को भी प्राप्त होन चाहिए । 
  •  आदमी किसी को वफादार नहीं है लेकिन वो अपेक्षा रखता है कि - सब मुझे वफादार रहे । 
  • जिसे कुछ करना नहीं है , या कुछ कर नहीं सकता उसकी ईर्ष्या निंदा दुर्भावना दूसरे के बिगड़ने में ही convert हो जाती हैं ।