श्री आदिनाथ जैन श्वेताम्बर मंदिर(चेन्नई पुलल) में बिराजित प्रवचन प्रभावक पूज्य आचार्य श्री अजितशेखरसूरीश्वरजी मा.सा. ने विशाल प्रवचन सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि:
- जिसने दुसरो को पूर्व भव में दान दिया हैं, समय पर दिया है और प्रेम से दिया हैं उसे ही ये भव में भोग-उपभोग कि सामग्री मिलती है, समय पर मिलती है और प्रेम से मिलती है ।
- पूर्व जन्म में हमने बहाने निकालकर धर्म आराधना की नहीं, धर्म किया तो भी उल्लास से न किया, दुसरो को आराधना में विघ्न अन्तराय किया, ये कारण से हमें ये जन्म में धर्म-आराधना में बहुत विघ्न अन्तराय आते हैं । कहीं शरीर बीमार होता है, कहीं घरवाले स्वजन न कहते है, कहीं हमरा मन ही कमजोर बन जाता है ।
- दुनिया में सर्वश्रेस्ठ लाभ मोक्ष का ही है, ये ही पर्मानेंट लाभ है, बाकी दुनिया कि सभी लाभ टेम्पररी है । अच्छा बंगला रहने मिला लेकिन ये भी टेम्पररी है, या बंगला नष्ट होगा या बंगले में रहनेवाले चले जायेंगे ।
- जो पुण्यशाली है, उसे द्रव्य, क्षेत्र, काल, भाव सब अनुकूल बन जाता है । जो पुन्यहीन है, उसे द्रव्य, क्षेत्र, काल, भाव सब प्रतिकूल बन जाता है । और पुण्य कि प्राप्ति धर्म-आराधना से ही होती है ।
- अपनी वंश-परंपरा को आगे बदाना है तो -
- कभी कार आदि वाहन बसाना नहीं
- बसाओ तो उसमे लम्भी मुसाफिरी करना नहीं
- एक ही कार में पुरे परिवार को मुसाफिरी करना नहीं
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