श्री आदिनाथ जैन श्वेताम्बर मंदिर(चेन्नई पुलल) में बिराजित प्रवचन प्रभावक पूज्य आचार्य श्री अजितशेखरसूरीश्वरजी मा.सा. ने सम्बोधित करते हुए कहा कि:
- नमस्कार महामंत्र इतना प्रभावशाली है कि - जिसके ध्यान से हमारे ज्ञानावर्णादि आठो कर्मो का नाश होता है; सौभाग्य, यश, कीर्ति आदि शुभकर्मो का उदय होता है ; असंख्य भव तक कष्ट और पीड़ा देने वाले अशुभ कर्मो से मुक्ति मिलती है । अनंतकाल के बाद मिले हुए इस महामंत्र का हम श्रद्धा से जाप करे तो अनंतकाल से हमें दुखदेने वाले विषय वासना कषायो रूपी बीमारियो से मुक्ति देनेवाली महान औषधि बन सकती है ।
- अनादिकाल से हमें कान के विषयो का आकर्षण है । उसमे भी संगीत-गीत-आत्मा प्रशंशा और परनिंदा सुनना उत्तरोत्तर पसंद है । और दुष्ट जीवो को तो दुसरो कि पीडाओ की चीख सुनकर भी आनंद आता है । ये ही विषयाकर्षण हमें भविष्य में अनंतकाल तक कान न मिले उसके लिए समर्थ है । कर्म सत्ता का कानून है कि - आपको जो सामग्री दी उसका आप सदुपयोग न करो और दुरूपयोग करो तो वह सामग्री आपको अनंतकाल तक न देगी ।
- हम अनंतकाल कि उम्र वाले बच्चे है । क्योंकि हमें आजतक पता नहीं चला कि - क्या पकड़ने जैसा है, क्या छोड़ने जैसा है । हमें जो आत्मा के लिए अहितकर है वो पकड़ लेते है और जो हितकर है वो छोड़ देते है ।
- कान के विषयो को जीतने के लिए कान पर हाथ रखकर "नमो अरिहंताणं" पद का जाप करो, संकल्प पूर्वक जाप करो कि मेरे कान प्रभु के गीत-संगीत में देव-गुरु-संघ कि प्रशंशा में और आत्मा कि निंदा सुनने में ही एकाग्र बने ।